Shankhnad Mahotsav

Sun 17 May 2026 4:00 pm — 8:00 pm

Shri Rajamatangi Mahayajna

Nardulla Tank Ground

Shri Rajamatangi Mahayajna

A Mahayajna for the protection of Bharat and the welfare of society

A Mahayajna for the protection of Bharat and world welfare भारत की रक्षा और विश्वकल्याण हेतु एक महायज्ञ भारताचे रक्षण आणि विश्वकल्याणासाठी एक महायज्ञ

-- Daysदिनदिवस
-- Hoursघंटेतास
-- Minutesमिनटमिनिटे
-- Secondsसेकंडसेकंद
📅 Sunday, 17 May 2026  |  4:00 PM – 8:00 PM रविवार, १७ मई २०२६  |  सायं ४:०० – ८:०० बजे रविवार, १७ मे २०२६  |  सायं ४:०० – ८:०० वाजता
📍 Nardulla Tank Ground, Behind Shri Siddhivinayak Mandir, Prabhadevi, Mumbai नर्दुल्ला टँक मैदान, श्री सिद्धिविनायक मंदिर के पीछे, प्रभादेवी, मुंबई नर्दुल्ला टँक मैदान, श्री सिद्धिविनायक मंदिराच्या मागे, प्रभादेवी, मुंबई
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Join us online on Sunday, 17 May 2026 from 4:00 PM IST here and on Sanatan Sanstha's official YouTube channel. रविवार, 17 मई 2026 को अपराह्न 4:00 बजे IST से सनातन संस्था के YouTube चैनल पर ऑनलाइन जुड़ें। रविवारी, 17 मे 2026 रोजी दुपारी 4:00 वाजता IST ला सनातन संस्थेच्या YouTube वाहिनीवर सहभागी व्हा.

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The Mahayajnaमहायज्ञमहायज्ञ

About Shri Rajamatangi Devi श्री राजमातंगी देवी के बारे में श्री राजमातंगी देवीविषयी

The ten forms of Shakti that emerged from Adishakti Devi Sati are known as the Dashamahavidya — Kali, Tara, Shodashi, Bhuvaneshwari, Tripurabhairavi, Chhinnamasta, Dhumavati, Bagalamukhi, Matangi, and Kamala. Since She is regarded as the Principal Adishakti, She is known as Shri Rajamatangi. Matangi, the ninth form, purifies speech and bestows knowledge. आदिशक्ति देवी सती के क्रोध से प्रकट शक्ति की दस रूपों को दशमहाविद्या कहते हैं — काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, त्रिपुरभैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला। मातंगी आदिशक्ति की प्रधानमंत्री हैं, इसीलिए उन्हें श्री राजमातंगी कहा जाता है। श्री राजमातंगी वाणी को शुद्ध करती और ज्ञान देती हैं। आदिशक्ती देवी सतीच्या क्रोधातून प्रकट शक्तीच्या दहा रूपांना दशमहाविद्या म्हणतात — काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, त्रिपुरभैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी आणि कमला. मातंगी आदिशक्तीची प्रधानमंत्री असल्याने श्री राजमातंगी म्हणतात. ही देवी वाणी शुद्ध करणारी आणि ज्ञान देणारी आहे.

The need for Shri Rajamatangi Yajna - At a time when the world faces the threat of war, the protective shield of Shri Rajamatangi Devi is essential for safeguarding Bharat — the spiritually sacred land. During the era of Shriram, it was through the active Principle of this Goddess that Ram Rajya became ideal. In the present times, Her grace is essential for the establishment of Ram Rajya. श्री राजमतंगी यज्ञ की आवश्यकता - जब विश्व युद्ध के संकट का सामना कर रहा है, तब भारत की रक्षा के लिए श्री राजमातंगी देवी का सुरक्षा कवच अनिवार्य है। श्रीराम के युग में इस देवी के सक्रिय तत्व से रामराज्य आदर्श बना था। वर्तमान में भी रामराज्य की निर्मिति के लिए उनकी कृपा आवश्यक है। ​श्री राजमतंगी यज्ञाची आवश्यकता - सध्याच्या युद्धकाळात तपोभूमी भारतभूमीला संरक्षककवच लाभावे आणि भारताची सर्वांगीण अभिवृद्धी यासांठी श्री राजमातंगी देवीची उपासना आवश्यक आहे. श्रीरामाच्या युगात या देवीच्या सक्रिय तत्त्वामुळे रामराज्य आदर्श बनले होते. सध्याच्या काळातही रामराज्याच्या निर्मितीसाठी देवीची कृपा आवश्यक आहे.

Protection of Bharatभारत की रक्षाभारताचे रक्षण
A protective shield over India during these times of global conflict and uncertainty.वैश्विक संघर्ष के इस काल में भारत पर सुरक्षा कवच।जागतिक संघर्षाच्या काळात भारतावर संरक्षण कवच.
All-round Developmentसर्वांगीण विकाससर्वांगीण विकास
Collective prayers for the Nation's growth, progress, and overall welfare.राष्ट्र की वृद्धि और समग्र कल्याण के लिए सामूहिक प्रार्थना।राष्ट्राच्या वाढीसाठी सामूहिक प्रार्थना.
Establishment of Ram Rajyaरामराज्य की स्थापनारामराज्याची स्थापना
A historic step towards a spiritually guided, just, and peaceful society.आध्यात्मिक, न्यायपूर्ण और शांतिपूर्ण समाज की ओर एक ऐतिहासिक कदम।आध्यात्मिक, न्याय्य आणि शांतिपूर्ण समाजाच्या दिशेने ऐतिहासिक पाऊल.
Spiritual Benefitआध्यात्मिक लाभआध्यात्मिक लाभ
Attending or contributing to the Mahayajna grants divine grace to all participants.महायज्ञ में उपस्थिति या योगदान सभी को दैवीय कृपा देता है।महायज्ञात उपस्थिती किंवा योगदान सर्वांना दैवी कृपा देते.
देवान्भावयतानेन ते देवा भावयन्तु वः ।
परस्परं भावयन्तः श्रेयः परमवाप्स्यथ ।।
— Shrimadbhagawadgeeta 3:11
"By conducting Yajnas, nourish the Deities, and those Deities will in turn nourish you. Thus, by supporting one another, all of you shall attain supreme welfare." "यज्ञों द्वारा देवताओं को प्रसन्न करो और वे बदले में तुम्हें संतुष्ट करेंगे। इस प्रकार परस्पर सहयोग से सभी परम कल्याण प्राप्त करोगे।" "ययज्ञाद्वारे तुम्ही देवतांना संतुष्ट करून घ्या आणि त्या देवता तुम्हाला संतुष्ट करोत. अशा प्रकारे एकमेकान सहकार्य केल्यामुळे तुम्हा सर्वांचे परमकल्याण होईल."

"यज्ञो वै श्रेष्ठतमं कर्मः" — Yajna is the noblest of all actions.यज्ञ ही सर्वश्रेष्ठ कर्म है।यज्ञ हेच सर्वश्रेष्ठ कर्म आहे.

— Shatpath Brahman

When & Whereकब और कहाँकधी आणि कुठे

Event Detailsकार्यक्रम विवरणकार्यक्रम

Dateतारीखतारीख
Sunday, 17 May 2026रविवार, १७ मई २०२६रविवार, १७ मे २०२६
Timeसमयवेळ
4:00 PM – 8:00 PMसायं ४:०० – ८:०० बजेसायं ४:०० – ८:०० वाजता
Venueस्थानस्थळ
Nardulla Tank Ground, Behind Shri Siddhivinayak Mandir, Prabhadevi, Mumbaiनर्दुल्ला टँक मैदान, श्री सिद्धिविनायक मंदिर के पीछे, प्रभादेवी, मुंबईनर्दुल्ला टँक मैदान, श्री सिद्धिविनायक मंदिराच्या मागे, प्रभादेवी, मुंबई

The Mahayajna commences with the invocation of Shri Ganesh, Punyahavachan, and Mahasankalpa. Oblations will be offered with recitation of Shri Rajamatangi Devi's mulamantra. The event concludes with Mahapurnahuti and collective prayer. Special opportunity: Darshan of the Divine fragments of Sorti Somnath Jyotirlinga. महायज्ञ का प्रारंभ श्री गणेश आवाहन, पुण्याहवाचन और महासंकल्प से होगा। मूलमंत्र जप के साथ आहुतियाँ दी जाएंगी। महापूर्णाहुति और सामूहिक प्रार्थना से समापन। विशेष: सोरटी सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दिव्य अवशेषों का दर्शन महायज्ञाचा प्रारंभ श्री गणेश आवाहन, पुण्याहवाचन आणि महासंकल्पाने होईल. मूलमंत्राचे परायण करत आहुती देण्यात येईल. महापूर्णाहुती आणि सामूहिक प्रार्थनेने समापन. विशेष: सोरटी सोमनाथ ज्योतिर्लिंगाच्या भागांचे दिव्य दर्शन.

This Mahayajna takes place in Mumbadevi (Mumbai) — where Sachchidananda Parabrahman (Dr) Athavale began His mission to serve Dharma — making it a historic occasion. यह महायज्ञ मुंबादेवी की नगरी (मुंबई) में होगा — जहाँ सच्चिदानंद परब्रह्म (डॉ.) आठवले ने धर्मसेवा प्रारंभ की — जो इसे एक ऐतिहासिक अवसर बनाता है। हा महायज्ञ मुंबादेवीच्या नगरीत (मुंबई) येथे होणार — जेथे सच्चिदानंद परब्रह्म (डॉ.) आठवले यांनी धर्मसेवेचे कार्य सुरू केले — हे एक ऐतिहासिक प्रसंग आहे.

Your Roleआपकी भूमिकाआपली भूमिका

Why Attend & Participateउपस्थिती के लाभसहभागी होण्याचे लाभ

  • 🔥
    Be Part of a Historic Eventएक ऐतिहासिक कार्यक्रम का हिस्सा बनेंएका ऐतिहासिक कार्यक्रमाचा भाग व्हा Around 5,000 devotees are expected at this Mahayajna officiated by learned and devout priests — a collective spiritual offering for the Nation. विद्वान एवं तपस्वी पुरोहितों द्वारा संचालित इस महायज्ञ में लगभग 5,000 भक्तों की उपस्थिति अपेक्षित है — राष्ट्र के लिए एक सामूहिक आध्यात्मिक अर्पण। विद्वान आणि तपस्वी पुरोहितांद्वारे करण्यात येणाऱ्या या महायज्ञात सुमारे 5,000 भाविकांची उपस्थिती अपेक्षित — राष्ट्रासाठी सामूहिक आध्यात्मिक अर्पण.
  • 🌍
    Service to Dharma & Nationधर्म और राष्ट्र की सेवाधर्म आणि राष्ट्राची सेवा Participating or donating is an act of Dharma dan — sacred service towards the protection and progress of Bharat. भाग लेना या दान देना धर्म दान है — भारत की रक्षा और प्रगति के लिए एक पवित्र सेवा। सहभाग किंवा अर्पण हे धर्म दान आहे — भारताच्या रक्षण आणि प्रगतीसाठी पवित्र सेवा.
  • Receive Spiritual Graceआध्यात्मिक कृपा प्राप्त करेंआध्यात्मिक कृपा प्राप्त करा The Yajna bestows spiritual benefits on all who attend. Bring your family and receive the Divine blessings of Shri Rajamatangi Devi. उपस्थित सभी को महायज्ञ का आध्यात्मिक स्तर पर लाभ होगा। अपने मित्र-परिवार को लाएं और देवी के आशीर्वाद पाएं। उपस्थित सर्वांना यज्ञाचा आध्यात्मिक स्तरावर लाभ होईल. कुटुंबासह या आणि देवीचे आशीर्वाद प्राप्त करा.
  • 📿
    Collective Spiritual Strengthसामूहिक आध्यात्मिक शक्तिसामूहिक आध्यात्मिक शक्ती Every offering, prayer, and presence adds to the collective spiritual energy — for the welfare of all humanity. प्रत्येक अर्पण, प्रार्थना और उपस्थिति सामूहिक आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाने में योगदान करती है — संपूर्ण मानवता के कल्याण के लिए। प्रत्येक अर्पण, प्रार्थना आणि उपस्थिती सामूहिक ऊर्जेत भर घालते — संपूर्ण मानवतेच्या कल्याणासाठी.
Become a Saha-Yajamanसह-यजमान बनेंसह-यजमान व्हा
By offering ₹5 Lakhs, become a Saha-Yajaman in the Sankalpa Vidhi — a sacred oblation in the establishment of Ram Rajya.₹5 लाख का योगदान करें, संकल्प विधि में सह-यजमान बनकर रामराज्य की स्थापना में एक पवित्र आहुति।₹5 लाख अर्पण करून संकल्प विधीत सह-यजमान व्हा — रामराज्याच्या स्थापनेतील पवित्र आहुती.
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The Organiserआयोजकआयोजक

Sanatan Sanstha

Sachchidananda Parabrahman (Dr) Jayant Athavale
Sachchidananda Parabrahman (Dr) Jayant Athavale
An internationally renowned clinical hypnotherapist, He founded Sanatan Sanstha in 1999 to propagate Spirituality in scientific terminology. He has conducted extensive spiritual research and compiled numerous Texts to establish Spirituality as a science. Sanatan Sanstha has conducted more than 300 Yajnas and over 1,000 Religious rituals for the establishment of Ram Rajya and the welfare of society. एक अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त सम्मोहन चिकित्सक, आपने 1999 में सनातन संस्था की स्थापना की। आपने व्यापक आध्यात्मिक शोधकार्य किया और आध्यात्म को शास्त्र के रूप में स्थापित करने हेतु अनेक ग्रंथ लिखे। आपसे प्रेरणा लेकर सनातन संस्था ने विश्वकल्याण एवं भारत की सुरक्षा हेतु 300 से अधिक यज्ञ और 1,000 से अधिक धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए हैं। आंतरराष्ट्रीय कीर्तीचे संमोहन उपचारतज्ञ, सच्चिदानंद परब्रह्म (डॉ) आठवले यांनी 1999 मध्ये सनातन संस्थेची स्थापना केली. त्यांनी विपुल आध्यात्मिक संशोधन करून सनातन धर्म आणि अध्यात्मावरील अनेक ग्रंथ संकलित केले आहे. त्यांच्या प्रेरणेने सनातन संस्थेने विश्वकल्याण आणि भारताचे संरक्षण व्हावे म्हणून 300 हून अधिक यज्ञ आणि 1,000 हून अधिक धार्मिक विधी संपन्न केले आहेत.
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Location

Behind Shri Siddhivinayak Mandir, Prabhadevi, Mumbai